Sunday, 19 January 2020

अंकोरवाट मंदिर: विलक्षण स्थापत्य कला

   अंकोरवाट मंदिर को प्राचीन स्थापत्य कला का एक अद्भुत एवं विलक्षण अलंकरण कहा जाना चाहिए। जी हां, कंबोडिया का यह शानदार एवं अद्भुत मंदिर वस्तुत: दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक है। 

   लिहाजा इसे अद्भुत एवं विलक्षण कहना कोई अतिश्योक्ति न होगी। कंबोडिया के अंकोर का अंकोरवाट मंदिर वस्तुत: भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। करीब 162.6 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला अंकोरवाट मंदिर अति प्राचीन धरोहर एवं धार्मिक पर्यटन है। 

   मान्यता है कि कंबोडिया के खमेर साम्राज्य ने इसका निर्माण एक विशाल हिन्दू मंदिर के रूप में कराया था। हालांकि बाद में 12वीं शताब्दी के आसपास अंकोरवाट मंदिर ने बौद्ध मंदिर का स्वरूप अख्तियार कर लिया। अंकोर स्थित इस दिव्य-भव्य मंदिर को वैश्विक ख्याति हासिल है।

  विशेषज्ञों की मानें तो अंकोर को प्राचीनकाल में यशोेधरपुर के नाम से जाना एवं पहचाना जाता था। मीकांग नदी के किनारे स्थित अंकोरवाट मंदिर सिमरिप शहर में स्थित है। मान्यता है कि अंकोरवाट मंदिर संसार का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर है।

   कंबोडिया के सम्मान के प्रतीक अंकोरवाट मंदिर को वर्ष 1983 में कंबोडिया सरकार ने राष्ट्रीय ध्वज भी प्रदान किया है। अंकोरवाट मंदिर वस्तुत: मेरु पर्वत का भी प्रतीक है।
  मंदिर का वास्तुशिल्प अति दर्शनीय है। मनोहारी वास्तुशिल्प कंबोडिया सहित वैश्विक पर्यटकों को आकर्षित करता है। लिहाजा वैश्विक पर्यटकों की भारी आवाजाही बनी रहती है। 

   अंकोरवाट मंदिर की दीवारों पर हिन्दू धर्म ग्रंथों की कथा-गाथा का अत्यंत सुन्दर ढ़ंग से वर्णन किया गया है। इस प्रसंगों में अप्सराओं का चित्रण अति सुन्दर ढं़ग से किया गया है। देवताओं एवं असुरों के बीच समुद्र मंथन का दृश्यावलोकन अति मनोहारी चित्रण है। यह चित्रण पत्थरों को उकेर कर किया गया है। 

   मंदिर के गलियारों में तत्कालीन सम्राट, बलि-बामन, स्वर्ग-नरक, समुद्र मंथन, देव-दानव युद्ध, महाभारत, रामायण, हरिवंश पुराण, कृष्ण लीला आदि इत्यादि बहुत कुछ दर्शनीय है। मंदिर के शिलाचित्रों में राम कथा अत्यंत दर्शनीय है। यह राम कथा रावण वध हेतु देवताओं द्वारा की गयी आराधना से प्रारम्भ होती है।

   इसमें सीता स्वयंवर का दृश्य बेहद मनोहारी है। राम कथा में बाल कांड, स्वर्ण मृग आखेट, सुग्रीव-राम मैत्री, बालि-सुग्रीव द्वंद युद्ध, अशोक वाटिका, राम-रावण युद्ध, सीता की अग्नि परीक्षा, राम की अयोध्या वापसी आदि इत्यादि बहुत कुछ दर्शनीय है। 

   खमेर स्थापत्य शैली को दर्शाने वाला अंकोरवाट मंदिर मिरुा एवं मेक्सिको के स्टेप पिरामिड़ों की भांति सीढ़ियों की श्रंखला से ऊपर की दिशा की ओर उठता है। मंदिर का मूल शिखर करीब 64 मीटर ऊंचा है जबकि अन्य सभी 8 शिखर 54 मीटर ऊंचे हैं। खास यह है कि मंदिर करीब साढ़े तीन किलोमीटर लम्बी पत्थर की दीवार से घिरा है।

  इस दीवार के बाहर करीब तीस मीटर खुली भूमि है। इसके बाहर करीब 190 मीटर चौड़ी गहरी खाई है। विशेषज्ञों की मानें तो अंकोरवाट मंदिर विश्व का सबसे लोकप्रिय धार्मिक पर्यटन है। इसकी लोकप्रियता का एक सबसे बड़ा कारण इसका सुन्दर वास्तुशिल्प आैर नक्काशी है। 

   शायद इसीलिए इस मंदिर को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है। विशेषज्ञों की मानें तो अंकोरवाट मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा विष्णु मंदिर है।

  खास यह कि अंकोरवाट मंदिर केवल स्थापत्य कला की श्रेष्ठतम कृति ही नहीं है, बल्कि यहां से सूर्योदय एवं सूर्यास्त भी अत्यंत मनोहारी दिखता है। विद्वानों की मानें तो मंदिर की स्थापत्य कला चोल वंश के मंदिरों से मिलती जुलती है।
   इसके दक्षिण-पश्चिम में स्थित विशाल ग्रंथालय है। इस मंदिर में तीन विशाल वीथिकाएं हैं। अंकोर की इस विश्व धरोहर को देखने दुनिया के श्रद्धालु एवं पर्यटक आते हैं।

  अंकोरवाट मंदिर कंबोडिया की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट सिमरीप इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन सिमरीप रेलवे स्टेशन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी अंकोरवाट मंदिर कंबोडिया की यात्रा कर सकते हैं।
12.565679,104.990967

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