Friday, 28 December 2018

ग्रैंड कैन्यन घाटी: प्राकृतिक सुन्दरता

   ग्रैंड कैन्यन घाटी की प्राचीन सुन्दरता का कोई जोड़ नहीं। जी हां, ग्रैंड कैन्यन घाटी की प्राकृतिक सुन्दरता किसी को मुग्ध कर लेती है। इसे सौन्दर्य का अद्भुत अलंकरण कहा जाना चाहिए।

   शायद इसी लिए ग्रैंड कैन्यन घाटी को वैश्विक पर्यटन की दृष्टि से देखा जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका के राज्य एरिजोना क्षेत्र में स्थित ग्रैंड कैन्यन घाटी वैश्विक पर्यटकों का पसंदीदा क्षेत्र है। ग्रैंड कैन्यन घाटी वस्तुत: ग्रैंड कैन्यन नेशनल पार्क से चौतरफा घिरी है।

   भू-विशेषज्ञों की मानें तो यह कोलोराडो नदी की एक धारा है। विशेषज्ञों की मानें तो ग्रैंड कैन्यन घाटी 60 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आई थी।
   इस घाटी की लम्बाई एवं चौड़ाई आश्चर्यजनक थी। ग्रैंड कैन्यन घाटी की लम्बाई करीब 446 किलोमीटर है। गहराई भी कम नहीं है।

   इसकी गहराई 6000 फुट है। खास यह कि इस घाटी की चौड़ाई भी आश्चर्यजनक है। ग्रैंड कैन्यन घाटी की चौड़ाई कहीं 6.4 किलोमीटर है तो कहीं इसकी चौड़ाई 29 किलोमीटर तक है। 
  विशेषज्ञों की मानें तो कोलोराडो नदी का पठार धीरे-धीरे उपर उठता गया। लिहाजा अद्भुत दृश्य उभर कर सामने आये।

  विशेषज्ञों की मानें तो कोलोराडो नदी एवं उसकी सहायक नदियों ने इस क्षेत्र को परत-दर-परत काटा। इससे धरती का एक अलग ही इतिहास संरचित हुआ। नदियों के संगम स्थल को कैबब महराब कहते हैं।
   विशेषज्ञों की मानें तो आधुनिक अमेरिका के 1779 में उद्भव अर्थात अस्तित्व में आने से पूर्व इस क्षेत्र में अमेरिकी इंडियंस प्रवास करते थे। ग्रैंड कैन्यन घाटी की विहंगम गुफाएं उनका निवास होती थीं। इन गुफाओं में बस्तियां तक थीं।

   खास यह कि इस विहंगम घाटी में कई पवित्र धार्मिक स्थान भी थे। धार्मिक स्थानों पर तीर्थ यात्राओं के भी आयोजन होते थे। नए परीक्षणों के बाद भू-विशेषज्ञों की मानें तोे कोलोराडो नदी घाटी एक करोड़ सत्तर लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में थी। 
  विशिष्टताओं के कारण अमेरिका ने ग्रैंड कैन्यन घाटी एवं ग्रैंड कैन्यन नेशनल पार्क को राष्ट्रीय सम्पत्ति घोषित किया है। 
   हालात यह हैं कि ग्रैंड कैन्यन घाटी असंख्य प्राणियों को संरक्षण देती है। खास यह कि इस विशालकाय ग्रैंड कैन्यन घाटी को देखने के लिए वैश्विक पर्यटकों का हुजूम उमड़ता है। 
  पर्यटक कोलोराडो नदी में जलक्रीड़ा का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। पर्यटक वॉटर स्पोटर्स एवं रॉफ्टिंग के शौक को पूरा कर सकते हैं। 

   ग्रैंड कैन्यन घाटी एक विशाल प्राकृतिक आश्चर्य है। शायद इसीलिए ग्रैंड कैन्यन घाटी अमेरिका का सबसे बड़ा पर्यटन केन्द्र है।
   खास यह कि इस विशालकाय ग्रैंड कैन्यन घाटी को देखने के लिए हवाई जहाज की सुविधा भी उपलब्ध है। खास यह कि ग्रैंड कैन्यन घाटी चौतरफा सुरम्य घाटियों-वादियों की श्रंखला से घिरी है।

   ग्रैंड कैन्यन घाटी के आसपास की अन्य घाटियों-वादियों मेें ग्रैंड कैन्यन नेशनल पार्क, काइब नेशनल फॉरेस्ट, ग्रैंड कैनियन पाराशांत नेशनल मान्यूमेंट, ह्युलापाई इंडियन रिजर्वेशन आदि हैं। 
  खास यह कि तत्कालीन राष्ट्रपति थियोडोर रुजवेल्ट ग्रैंड कैन्यन घाटी को राष्ट्रीय संरक्षण के प्रमुख प्रस्तावक थे।

   जिससे इस विलक्षण घाटी को शासकीय संरक्षण हासिल हो सके। विलक्षणता यह कि ग्रैंड कैन्यन घाटी में वन्य जीवन का कोलाहल है तो वहीं प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों को रोमांचित कर देते हैं। 
  विशेषज्ञों की मानें तो ग्रैंड कैन्यन घाटी की खोज करने वालों में यूरोपियन स्पेन के गार्सिया लोपेज डे कैंडनस थे। वह ग्रैंड कैन्यन घाटी पर 1540 में आये थे।

   खास यह कि ग्रैंड कैन्यन घाटी की जलवायु भिन्न-भिन्न रहती है। विशेषज्ञों की मानें तो ग्रैंड कैन्यन घाटी में डायनासोर की हड्डियों की भी तलाश की जा रही है।
  ग्रैंड कैन्यन घाटी की पथरीली चट्टानें कहीं गहरी खाई को अस्तित्व देती हैं तो कहीं भव्य दीवार की भांति दिखतीं हैं।

   इन पथरीली चट्टानों का सौन्दर्य बेहद दर्शनीय है। खास यह कि ग्रैंड कैन्यन घाटी को विश्व के मुख्य प्राकृतिक आश्चर्य में शीर्ष पर माना गया है।
  ग्रैंड कैन्यन घाटी एवं ग्रैंड कैन्यन नेशनल उद्यान करीब 4927 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला है। 

   इस विहंगम पर्यटन क्षेत्र ग्रैंड कैन्यन घाटी का भ्रमण करना पर्यटकों के लिए बेहद रोमांचक होता है।
   ग्रैंड कैन्यन घाटी की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट फीनिक्स स्काई हार्बर एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन एरिजोना है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी ग्रैंड कैन्यन घाटी की यात्रा कर सकते हैं।
35.028790,-114.571530

जाफलाँग हिल स्टेशन: पत्थरों का सौन्दर्य

   नदियों एवं घाटियों में पत्थरों का सौन्दर्य देखना हो तो जाफलाँग हिल स्टेशन का भ्रमण करना चाहिए। जी हां, बांग्लादेश का यह हिल स्टेशन पत्थरों के प्राकृतिक सौन्दर्य से आच्छादित है। 

   जाफलाँग हिल स्टेशन खास तौर से पत्थरों की सुन्दरता के लिए जाना पहचाना जाता है। सिलहट डिवीजन का यह हिल स्टेशन पर्वतीय सौन्दर्य का इन्द्रधनुषी आयाम है।
   वर्षा वन क्षेत्र एवं पहाड़ों से आच्छादित जाफलाँग हिल स्टेशन वैश्विक पर्यटन में खास ख्याति रखता है। जाफलाँग हिल स्टेशन बांग्लादेश के उप जिला गोविंगघाट का इलाका है।

   खास यह कि जाफलाँग हिल स्टेशन पर प्राकृतिक सौन्दर्य का हर आयाम स्पर्श करता है। देवदार एवं पाइन के जंगलों से आच्छादित जाफलाँग हिल स्टेशन को सौन्दर्य का खजाना कहा जाना चाहिए।
   सिलहट शहर से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित जाफलाँग हिल स्टेशन वस्तुत: खासी जनजातीय समुदाय का क्षेत्र है। 

   लिहाजा पर्यटक इस हिल स्टेशन पर आदिवासी लोक संस्कृति को देख सकते हैं। समझ सकते हैं। जाफलाँग हिल स्टेशन पर चाय बागानों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है।
  लिहाजा चाय की भीनी-भीनी सुगंध से परिवेश लबरेज रहता है। पहाड़ों से लुढ़कते गोल पत्थरों का आकर्षण पर्यटकों को मुग्ध कर लेता है। 

   इस दुर्लभ सुन्दरता के बीच जाफलाँग हिल स्टेशन बेहद दर्शनीय प्रतीत होता है। विशेषज्ञों की मानें तो जाफलाँग हिल स्टेशन वस्तुत: रोलिंग स्टोंस के लिए खास तौर से जाना पहचाना जाता है।
   खास यह कि जाफलाँग हिल स्टेशन बांग्लादेश एवं भारत के सीमा क्षेत्र का हिल स्टेशन है। जाफलाँग हिल स्टेशन भारत के राज्य मेघालय से सटा हुआ है। 

  यह हिल स्टेशन बांग्लादेश के शहर सिलहट के फेफड़ों के तौर पर जाना पहचाना जाता है। जाफलाँग हिल स्टेशन को बांग्लादेश में जाफलाँग ग्रीन पार्क के तौर पर भी जाना जाता है।
   हालांकि ग्रीन पार्क वस्तुत: जाफलाँग हिल स्टेशन का एक हिस्सा है। यह पार्क मनोरंजन के विविध आयाम संसाधन रखता है। जाफलाँग ग्रीन पार्क में आैषधीय वनस्पतियों की प्रचुरता है। लिहाजा यहां पर्यटकों को प्राण वायु का एहसास होता है। 

   इस सुन्दर पार्क का रखरखाव जाफलाँग फाउण्डेशन एवं वन विभाग संयुक्त रूप से करते हैं। करीब 100 हेक्टेयर भूमि वाला यह क्षेत्र आकाश एवं मोहनी सहित अनेक प्रकार की प्रजातियों के पेड़ श्रंखला से आच्छादित है। 
  घाटी में नदियों का प्रवाह एवं चौतरफा पर्वत शिखर का सौन्दर्य बेहद दर्शनीय प्रतीत होता है। जाफलाँग हिल स्टेशन का मुख्य आकर्षण मारी नदी है।

  पर्यटक यहां जलक्रीड़ा के साथ ही नौकायन या मछली पकड़ने का भी शौक पूरा कर सकते हैं। नौकायन करते हुए प्राकृतिक सौन्दर्य को निहारना बेहद रोेमांचक होता है। खासी पल्ली गांव भी जाफलाँग हिल स्टेशन का एक विशेष अाकर्षण है। 

   गांव की प्राचीनता एवं लोक संस्कृति बेहद लुभावनी है। खासी जनजातीय समुदाय की अपनी एक अलग संस्कृति है। खासी में मातृ प्रणाली का अनुसरण एक असाधारण परम्परा है।
   मानसून के मौसम में जाफलाँग हिल स्टेशन का प्राकृतिक सौन्दर्य आैर भी अधिक निखर आता है। कारण चौतरफा हरा भरा परिदृश्य अवलोकित होता है। यहां की झीलों-झरनों का अपना एक अलग आकर्षण एवं सौन्दर्य है। सर्दियों में यहां की सुन्दरता का अपना एक अलग अंदाज दिखता है। 

  जाफलाँग हिल स्टेशन पर जैनपुर के वन क्षेत्र खास प्रसिद्ध हैं। श्रीपुर एवं तमाबिल भी यहां के दर्शनीय स्थल हैं। पान एवं सुपारी की खेती खास यहां देखने को मिलेगी। पर्यटक जाफलाँग हिल स्टेशन पर हिल ट्रैकिंग का भी आनन्द ले सकते हैं। इस दौरान पर्यटक वन्य जीवन का रोमांच भी महसूस कर सकते हैं। 

   जाफलाँग हिल स्टेशन पर श्रीपुर का वॉटर फॉल्स पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां पर्यटक नारंगी उद्यान का भ्रमण कर सकते हैं। जयंतपुर यहां का एक अति महत्वपूर्ण पर्यटन क्षेत्र है। 
  यह इलाका ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के लिए खास तौर से जाना पहचाना जाता है। यहां जैन राजाओं के महल एवं जयंत राजबाड़ी सहित बहुत कुछ दर्शनीय है।
    जाफलाँग हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट उस्मानी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सिलहट है। सिलहट से जाफलाँग हिल स्टेशन की दूरी करीब 0.80 मील है। निकटतम रेलवे स्टेशन भी सिलहट जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी जाफलाँग हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
24.903561,91.873611

Wednesday, 26 December 2018

स्वात घाटी: अद्भुत सुन्दरता

  स्वात घाटी की अद्भुत सुन्दरता को कुदरती करिश्मा कहा जाना चाहिए। जी हां, स्वात घाटी वस्तुत: प्रकृति का सुन्दर उपहार है। पाकिस्तान के खैबर पख्तुनख्वा प्रांत स्थित यह घाटी वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा पर्यटन क्षेत्र है। 

  वस्तुत: स्वात घाटी पाकिस्तान का प्रशासनिक जिला है। हालांकि घाटी का मुख्य शहर मिंगोरा है। स्वात घाटी में चौतरफा झीलों-झरनों, पर्वत शिखरों एवं घाटियों-वादियों का आच्छादन है।
  आकाश का स्पर्श करते शिखर श्रंखला पर्यटकों को मुग्ध कर लेते हैं। मखमली घास के मैदान एवं सघन वन क्षेत्र पर्यटकों को एक सुन्दर परिवेश देते हैं। 

  इन खूबसूरत हसीन वादियों-घाटियों में पर्यटक खुद की सुध-बुध खो देते हैं। बारिश एवं सर्दियों में स्वात घाटी की खूबसूरती आैर भी अधिक बढ़ जाती है।
   घाटी का विशेष आकर्षण बसंत ऋतु से शरद ऋतु तक रहता है। कारण चौतरफा मखमली घास के हरे-भरे मैदान नजर आते हैं तो वहीं पहाड़ों पर बर्फ की सुन्दर चादर दिखती है। 

   यह दृश्य अति लुभावना होता है। सर्दियों में यहां बर्फबारी का मौसम रहता है। चौतरफा पहाड़ों पर बर्फ की ओढ़नी दिखती है। 
  यह दृश्य बेहद मनोहारी एवं रोमांचक होता है। स्वात घाटी एवं उसके आसपास सुन्दर एवं आकर्षक स्थानों की एक लम्बी श्रंखला है।

   खास तौर से स्वात संग्रहालय, मालम जब्बा, बहरीन घाटी, कलाम, उसो, गबराल, महोदंड झील, पारी झील, कुण्डोल झील, बाशीग्राम झील एवं स्पिन ख्वार आदि इत्यादि बहुत कुछ दर्शनीय है।
   स्वात घाटी शीतलता एवं सुरम्यता के विशेष आकर्षण से वैश्विक पर्यटन के तौर पर ख्याति रखती है। स्वात घाटी की सुगंध पर्यटकों के दिलों पर छा जाती है। 
   स्वात संग्रहालय: स्वात संग्रहालय वस्तुत: मिंगोरा एवं सैदु के मध्य एक अति दर्शनीय संरचना है। स्वात संग्रहालय में सुन्दर दीर्घाओं की एक श्रंखला है। इसमें खास तौर से बौद्ध स्थलों की प्राचीन गंधरा मूर्तियां संग्रहित एवं प्रदर्शित है। 

  वस्तुत: यह संग्रहालय भगवान गौतम के जीवन काल को चित्रित एवं रेखांकित करता है। खास तौर से टेराकोटा की मूर्तियां, प्राचीन बर्तन, मोती, कीमती पत्थर, प्राचीन सिक्के, प्राचीन हथियार, धातु की वस्तुएं, गंधरा की जीवन शैली, प्राचीन कढ़ाई-बुनाई आदि बहुत कुछ प्रदर्शित है।
   बहरीन घाटी: बहरीन घाटी समुद्र तल से करीब 1400 मीटर ऊंचार्ई पर स्थित एक सुन्दर पर्यटन स्थल है। 

   बहरीन घाटी वस्तुत: हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। खूबसूरत नक्काशीदार लकड़ी का सामान पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां की कलात्मकता विलक्षण है।
   कलाम घाटी: कलाम घाटी वस्तुत: स्वात घाटी का एक सुन्दर एवं आकर्षक हिस्सा है। मिंगोरा से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित कलाम घाटी समुद्र तल से करीब 2070 मीटर ऊंचाई पर है। 

   वनस्पतियों से आच्छादित सुन्दर वन क्षेत्र  कलाम घाटी का मुख्य आकर्षण है। कलाम घाटी का मुख्य आकर्षण झील एवं झरनों की श्रंखला है। झीलों-झरनों की सुन्दरता पर्यटकों को बरबस आकर्षित करती है।    
   गबराल: गबराल वस्तुत: स्वात घाटी का एक सुन्दर आयाम है। समुद्र तल से करीब 2580 मीटर ऊंचाई पर स्थित यह इलाका बेहद शानदार एवं दर्शनीय है।

   यह इलाका आैषधीय वनस्पतियों के लिए विशेष ख्याति रखता है। पर्यटक यहां वनस्पतियों की सुगंध के साथ ही एक खास स्फूर्ति का एहसास करते हैं। खास यह कि यहां की 75 से अधिक वनस्पतियों का आैषधीय उपयोग किया जाता है।
   महोदंड झील: महोदंड झील कलाम घाटी से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित है। खास यह कि पाकिस्तान के खैबर पख्तुनख्वा की मुख्य झील है। महोदंड झील में पर्यटक मछली पकड़ने एवं नौकायन का शौक पूरा कर सकते हैं। झील मखमली घास के मैदानों, बर्फ से ढ़के पहाड़ों एवं वनस्पतियों से आच्छादित सघन वन क्षेत्र से चौतरफा घिरी है। 

   पारी झील: पारी झील खास तौर से स्वात घाटी की मुख्य झीलों में से एक है। सुन्दरता के कारण इस झील को परियों का निवास स्थान भी कहा जाता है। यहां फूलों की सुगंध दिल आैर दिमाग को एक ताजगी प्रदान करती है तो वहीं फूलों की सुन्दरता पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। 

   कुंडोल झील: कुंडोल झील खास तौर से एक सुरम्य एवं शांत स्थान है। यह इलाका खास तौर से एक शानदार पिकनिक स्पॉट के तौर पर ख्याति रखता है। इसे घाटी का रोमांटिक क्षेत्र कहा जा सकता है। देवदार एवं पाइन के वन आच्छादन से घिरा यह इलाका बेहद दर्शनीय है।
   बाशीग्राम झील: बाशीग्राम झील बेहद शांत एवं सुन्दर है। ट्रैकर्स का यह बेहद पसंदीदा क्षेत्र है।

   स्वात घाटी की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट सैदु शरीफ एयरपोर्ट है। सैदु शरीफ एयरपोर्ट से स्वात घाटी की दूरी करीब 40 किलोमीटर है।
   पर्यटक इस्लामाबाद इण्टरनेशनल एयरपोर्ट से भी स्वात घाटी की यात्रा कर सकते हैं। इस्लामाबाद से स्वात घाटी की दूरी करीब 315 किलोमीटर है। पर्यटक रेल एवं सड़क मार्ग से भी स्वात घाटी की यात्रा कर सकते हैं।
34.006960,71.533060 

Thursday, 20 December 2018

मालम जब्बा हिल स्टेशन: धरती का श्रंगार

  मालम जब्बा हिल स्टेशन को धरती का श्रंगार कहा जाना चाहिए। जी हां, मालम जब्बा हिल स्टेशन की खूबसूरती का कोई जोड़ नहीं। प्रकृति की यह संरचना निश्चय ही अद्भुत है।

  हिन्दू कुश पर्वत श्रंखला का यह हिल स्टेशन अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण वैश्विक पर्यटकों का पसंदीदा बन गया है।
  पाकिस्तान के पेशावर इलाके का यह सुन्दर हिल स्टेशन स्कीइंग के लिए खास प्रसिद्ध है। समुद्र तल से करीब 2805 मीटर ऊंचाई पर स्थित मालम जब्बा हिल स्टेशन खास तौर से बर्फबारी का इलाका है। 

  सर्दियों में यहां का सौन्दर्य अति दर्शनीय हो जाता है। दिसम्बर से फरवरी की अवधि में मालम जब्बा हिल स्टेशन पर पर्व-त्योहार जैसा परिदृश्य दिखता है।
   मालम जब्बा हिल स्टेशन में इस अवधि में स्कीइंग के शौकीन पर्यटकों का सैलाब उमड़ पड़ता है। इस अवधि में मालम जब्बा हिल स्टेशन के पर्वत श्रंखला के शिखरों से लेकर मखमली घास के मैदान एवं ढ़लान सभी बर्फ से ढ़के नजर आते हैं। 

   ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे साक्षात स्वर्ग उतर आया हो। विशेषज्ञों की मानें तो मालम जब्बा हिल स्टेशन पाकिस्तान का श्रेष्ठतम एवं बेहतरीन स्की रिजार्ट है। वस्तुत: मालम जब्बा हिल स्टेशन पाकिस्तान का मुख्य पर्यटन आकर्षण है।

   पाकिस्तान पर्यटन विकास निगम के स्वामित्व वाले इस क्षेत्र में पर्यटन की सभी आवश्यक सेेवाएं-सुविधाएं उपलब्ध हैं।
  रिजार्ट रोलर, आइस स्केटिंग, कुर्सी लिफ्ट, स्कीइंग प्लेटफार्म आदि इत्यादि बहुत कुछ मालम जब्बा हिल स्टेशन पर पर्यटकों को उपलब्ध रहता है।

   स्की रिजार्ट पर करीब 800 मीटर की स्की ढ़लान हैं। जिससे पर्यटक स्कीइंग का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। वस्तुत: मालम जब्बा हिल स्टेशन एवं आसपास प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूरित स्थानों की एक लम्बी श्रंखला है।

   मियांदाम प्राकृतिक सौन्दर्य का इन्द्रधनुषी आयाम है। गर्मियों में शांत एवं शीतलता का एहसास कराने वाला यह हिल स्टेशन का यह इलाका पर्यटकों को भरपूर ऊर्जा प्रदान करता है। मखमली घास के हरे-भरे लॉन मैदान पर्यटकों को लुभाते हैं। 

   मालम जब्बा हिल स्टेशन का यह इलाका खास तौर से सैर सपाटा के लिए बेहतरीन है। सघन वन क्षेत्र यहां की खास सुन्दरता है।
  कहीं पर्वत शिखर दिखते हैं तो कहीं घास के मखमली मैदान दिलों को लुभाते हैं। वनस्पतियों एवं फूलों की प्रचुरता परिवेश को सुगंधित बना देती है। 

   जिससे पर्यटक एक विशेष ताजगी का एहसास करते हैं। मालम जब्बा हिल स्टेशन के इस इलाके में ग्रामीण संस्कृति के भी दर्शन होते हैं। 
  खास यह कि यह इलाका बौद्धों के लिए भी जाना पहचाना जाता है। मदयान भी इस इलाके का विशेष आकर्षण है।

  मिंगोरा से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित यह इलाका बेहद दर्शनीय एवं आकर्षक है। समुद्र तल से करीब 1321 मीटर ऊंचाई वाला यह इलाका पर्यटकों को एक विशेष आनन्द की अनुभूति कराता है।

   मदयान खास तौर से शॉल एवं कढ़ाई-बुनाई के लिए विशेष तौर से जाना जाता है। जनजातीय आभूषण, नक्काशीदार लकड़ी का सामान इस इलाके की खास पहचान है। 
  विशेषज्ञों की मानें तो स्वात घाटी क्षेत्र का यह अंतिम इलाका है। यहां की ग्रामीण आवासीय संरचना पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। 

  खास यह कि मालम जब्बा हिल स्टेशन पर चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की निराली छटा बिखरी दिखती है। विशेषज्ञों की मानें तो मालम जब्बा हिल स्टेशन इलाका स्वात घाटी का ही बेहतरीन हिस्सा है।
  मालम जब्बा हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट सैदु शरीफ एयरपोर्ट है। 

   सैदु शरीफ एयरपोर्ट से मालम जब्बा हिल स्टेशन की दूरी करीब 40 किलोमीटर है। पर्यटक इस्लामाबाद इण्टरनेशनल एयरपोर्ट से भी मालम जब्बा हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं। 
  इस्लामाबाद से मालम जब्बा हिल स्टेशन की दूरी करीब 315 किलोमीटर है। पर्यटक रेल एवं सड़क मार्ग से भी मालम जब्बा हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
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Wednesday, 19 December 2018

नीलम घाटी: धरती का स्वर्ग

   नीलम घाटी को धरती का स्वर्ग कहा जाना चाहिए। जी हां, नीलम घाटी का प्राकृतिक सौन्दर्य निश्चय ही स्वप्नलोक जैसा है।

   आकाश का स्पर्श करती पर्वत श्रंखला, मखमली घास के भव्य-दिव्य मैदान एवं बादलों को रोमांचक स्पर्श आदि इत्यादि काफी कुछ नीलम घाटी विशेष बना देते हैं।
  नीलम घाटी पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद के उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित यह स्वप्न लोक बेहद शानदार है। शायद इसीलिए पाकिस्तान सहित दुनिया के प्रकृति प्रेमी पर्यटकों का यह सबसे अधिक पसंदीदा पर्यटन क्षेत्र है। 

   समुद्र तल से करीब 5200 मीटर ऊंचाई पर स्थित दुनिया का बेहतरीन पर्यटन स्थल नीलम घाटी अपनी आगोश में प्राकृतिक सौन्दर्य का इन्द्रधनुषी आयाम रखता है। 
   हालांकि नीलम घाटी की समुद्र तल से ऊंचाई कहीं 2300 मीटर है तो कहीं 5200 मीटर है। प्राकृतिक सुन्दरता के कारण ही नीलम घाटी को पाकिस्तान का मिनी स्वीटजरलैण्ड कहा जाता है।

   नीलम घाटी वस्तुत: आकाश का स्पर्श करते पर्वत, हरी-भरी वादियां-घाटियां, बहती नदियां एवं झीलों-झरनों की एक लम्बी श्रंखला से आच्छादित है। नीलम घाटी वस्तुत: पाकिस्तान का सर्वश्रेष्ठ एवं पसंदीदा पर्यटन क्षेत्र है। कुदरत के नायाब नजारे यहां दिखते हैं।

   इन मुग्ध करने वाले नजारों के मध्य पर्यटक खो से जाते हैं। खूबसूरत झीलें पर्यटकों को मुग्ध करती हैं। बाग-बगीचे नीलम घाटी की खास शोभा हैं। नीलम घाटी की नैसर्गिक सुन्दरता वैश्विक पर्यटकों को आकर्षित करती है। 
  विशेषज्ञों की मानें तो नीलम घाटी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का हिस्सा है। नीलम घाटी का मुख्य आकर्षण नीलम नदी है।

  विशेषज्ञों की मानें तो भारत एवं पाकिस्तान विभाजन से पहले नीलम नदी को किशन गंगा के नाम से जाना पहचाना जाता था। घाटी का गांव नीलम खास ख्याति रखता था। 

   लिहाजा भारत एवं पाकिस्तान विभाजन के बाद किशन गंगा का नाम गांव नीलम के नाम पर ही रख दिया गया। लिहाजा अब इसे नीलम नदी एवं नीलम घाटी के नाम से ख्याति हासिल है।
  वस्तुत: नीलम नदी भारत के जम्मू एवं कश्मीर से प्रवाहित होकर पाकिस्तान में प्रवेश करती है। कुछ आगे चल कर नीलम नदी मुजफ्फराबाद में झेलम नदी में विलय हो जाती है।

   नीलम घाटी वस्तुत: सघन वन क्षेत्र है। वन क्षेत्र में वनस्पतियों की प्रचुरता के साथ साथ वन्य जीवन का भी अपना विशेष अस्तित्व है। नीलम घाटी का फैलाव करीब 145 किलोमीटर तक है। इस सम्पूर्ण क्षेत्र में कहीं आकाश को छूते पहाड़ हैं तो कहीं नदियों का कल कल प्रवाह है।

   बादलों की आवाजाही तो सामान्य है। कभी पर्यटक बादलों की गोद में होते हैं तो कभी बादल पर्यटकों की गोद में होते हैं। यह पल बेहद रोमांचक होते हैं।   
  सर्दियों में तो नीलम घाटी की प्राकृतिक सुन्दरता आैर भी अधिक बढ़ जाती है। कारण सर्दियों में चौतरफा बर्फ की चादर दिखती है।

   पर्वत शिखर बर्फ की ओढ़नी में अति सुन्दर प्रतीत होते हैं। बर्फबारी का आनन्द लेना हो तो पर्र्यटकों को नवम्बर के बाद अपनी यात्रा प्लान करनी चाहिए। नवम्बर से फरवरी की अवधि बर्फबारी का बेहतरीन समय होता है। 
  शांत एवं शीतलता से आच्छादित नीलम घाटी हमेशा पर्यटकों को आमंत्रित करती है। लिहाजा पर्यटक कभी भी नीलम घाटी की सैर सपाटा का प्लान बना सकते हैं। बारिश में नीलम घाटी के नजारे बेहद अद्भुत एवं दर्शनीय होते हैं।

   प्राकृतिक सौन्दर्य से लबरेज नीलम घाटी एवं उसके आसपास आकर्षक स्थानों की एक लम्बी श्रंखला है। भारत की जम्मू एवं कश्मीर स्थित नियंत्रण रेखा से सटा नीलम घाटी का यह इलाका बेहद शांत एवं सुरम्य है। नीलम घाटी को पाकिस्तान का नील मणि भी कहा जाता है।

   नीलम घाटी की झीलों-झरनों की सुन्दरता देखते ही बनती है। पटिकाका यहां का एक दर्शनीय स्थान है। यह मुजफ्फराबाद से करीब 17 किलोमीटर दूर है। 
  यहां का चिड़ियाघर बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय है। धनी वॉटर फॉल्स की दर्शनीयता भी कम नहीं है। धनी वॉटर फॉल्स मुजफ्फराबाद से करीब 33 किलोमीटर दूर है। 

   नीलम घाटी की सुन्दरता को देखते हुए इसे नवविवाहित जोड़ों के लिए हनीमून का पसंदीदा स्थान माना जाता है। इसे रोमांटिक हिल्स भी कह सकते हैं। 
  नीलम झेलम हाइड्रो प्रोजेक्ट भी नीलम घाटी का एक दर्शनीय स्थल है। यह स्थान मुजफ्फराबाद से करीब 73 किलोमीटर है।
  नीलम घाटी पर्यटकों को घूमने फिरने से लेकर ठहरने एवं विश्राम सहित सभी आवश्यकताओं को पूरा करती है।
   पर्यटकों के लिए यहां शानदार काटेज उपलब्ध रहते हैं। पर्यटक सैर सपाटा के साथ स्वादिष्ट व्यंजन के भी चटखारे ले सकते हैं।
  नीलम घाटी की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट इस्लामाबाद इण्टरनेशनल एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन मुजफ्फराबाद जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी नीलम घाटी की यात्रा कर सकते हैं।
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