फायरफॉल : प्राकृतिक करिश्मा
देश-दुनिया में करिश्मा-चमत्कारों की कहीं कोई कमी नहीं। करिश्मा-चमत्कार को प्राकृतिक आभा का उद्भव कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी।
कल्पना करें कि किसी पहाड़ के झरना से पानी के स्थान पर आग का प्रवाह हो रहा हो तो शायद काफी कुछ अचरज सा लगेगा लेकिन इस दुनिया में ऐसा भी है।
पहाड़ से आग का झरना देख कर कहीं अचरज होगा तो वहीं दहशत भी दिखेगी। अमरीका के कैलिफोर्निया स्थित केयोजमाइट राष्ट्रीय उद्यान में पहाड से गिरने वाला झरना देख कर कहीं न कहीं सहम जायेंगे लेकिन इस अद्भूत झरना की एक झलक पाने के लिए लाखों पर्यटक अमेरिका आते-जाते हैं।
इसे आग उगलने वाले पहाड को 'फायरफॉल" के नाम से जाना-पहचाना जाता है। इस राष्ट्रीय उद्यान से करीब दो हजार फुट की ऊंचाई वाला यह पहाड सौन्दर्य का अनुपम उदाहरण बना है।
वस्तुत: यह पहाड आग नहीं उगलता बल्कि आग उगलने का करिश्मा रोशनी का करिश्मा है। सूरज की रोशनी से ऐसा आभास होता है कि पहाड से निकलने वाला पानी नहीं आग का झरना है।
इसके सौन्दर्य का सहज आंकलन इसी से किया जा सकता है कि वर्ष 1952 में हालीवुड फिल्म 'दि केन मुटिनी" की शूटिंग इस विलक्षण स्थल पर की गयी थी।
इसमें इस अद्भूत झरना को दृश्यावलोकित किया गया। दिलचस्प यह रहा कि यह पहाड एक होटल के शीर्ष पर है। वर्ष 1870 में होटल का मालिक अपने विजिटर के साथ आया था।
पहाड-झरना का करिश्मा देख कर स्थल को पर्यटन का स्वरुप दे दिया। हालात यह हैं कि देश-दुनिया से साल में 3.50 मिलियन से अधिक पर्यटक इस आग उगलते झरना को देखने आते हैं।
'फायरफॉल" के इस झरना पर वस्तुत: सूरज की रोशनी पहाड से टकरा कर पड़ती है। पहाड से टकरा कर आने वाली रोशनी झरना के पानी के रंग को आग के रंग में बदल देती है।
37.090240,-95.712891








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