कासा बाटलो महल: कहीं हड्डियां तो कहीं खोपड़ी
इच्छाशक्ति हो तो क्या नहीं हो सकता ! जी हां, बस कुछ नया या अनूठा करने की इच्छा हो तो निश्चित नया आयाम विकसित होगा।
देश-दुनिया में असंख्य अजूबा या विस्मय हैं। स्पेन के बार्सिलोना में सनक
या इच्छाशक्ति ने एक ऐसा महल बना डाला जिसे देखने के लिए दुनिया भर
पर्यटक-बाशिंदे आते हैं।
इस खास महल कासा बाटलो को देखने या घूमने के लिए 'ऑनलाइन" एण्ट्री टिकट भी
बुक कराये जा सकते हैं। इससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि 'कासा बाटलो"
दुनिया का खास एवं अद्भूत महल है।
महल 'कासा बाटलो" वैसे तो बना पत्थर, मोजेक एवं बालू के सम्मिश्रण से है
लेकिन ऐसा एहसास होता है कि इसमें हड्डियों का उपयोग किया गया है।
आकार-प्रकार एवं महल की संरचना हड्डियों पर आधारित दिखती है लेकिन वस्तुत:
ऐसा है नहीं।
बार्सिलोना के इस महल की अद्भूत डिजाइन इसे कुछ खास बनाती है। महल 'कासा बाटलो" को मशहूर वास्तुकार एंटोनी गौड़ी ने डिजाइन किया।
वास्तुकार एंटनी गौड़ी को खास तौर से अलंकरण, गुफाओं की संरचना एवं प्राकृतिक परिस्थितियों की संरचना के लिए जाना जाता है।
इस खूबसूरत महल का स्वामित्व जोसेप बाटलो एवं कासा बाटलो के पास है। इसे
जोसफ बाटलो हाउस भी कहा जाता है। महल को करीब एक सौ पन्द्रह साल पहले 1900
में खरीदा गया।
नव-डिजाइन व नव-निर्माण को ध्यान में रख कर इसे ध्वस्त कर दिया गया।
वास्तुकार एंटोनी गौडी़ की डिजाइन के आधार पर इसका निर्माण किया गया।
इसमें रंगीन स्तरित बालू, खास किस्म के पत्थर, मोजैक, सेरेमिक टाइल्स आदि
का उपयोग किया गया। दिलचस्प विशेषता यह है कि बालकनी, कक्ष, खम्भे सहित सभी
कुछ हड्डियों के आकार-प्रकार एवं सरंचना आधारित हैं।
महल को गौर से देखें तो खोपड़ी नुमा ढ़ांचा दिखता है। ऐसा प्रतीत होता है कि
बालकनी की कैनोपी इंसानी खोपड़ी है। कांच की खिड़कियां भी खास डिजाइन हैं।
इंटीरियर भी हड्डियों का आभास कराता है।
एंटोनी ने इसे 1904 में डिजाइन किया लेकिन इसके निर्माण में कई वर्ष लग
गये। महल की आकृति में कहीं चाकू का आभास होता है तो कहीं अजगर या तराजू
दिखता है।
खास तौर से अब इस शानदार एवं खास महल का संग्रहालय के तौर पर इस्तेमाल हो
रहा है। वास्तुकला का यह महल एक शानदार उदाहरण है। यहां प्रवेश के लिए
पर्यटक को 18 यूरो बतौर शुल्क चुकाने होते हैं।
बार्सिलोना में इस महल को 'कंकाल जैविक गुणवत्ता" का नमूना माना जाता है।
अनियमित अण्डाकार खिड़कियां बताती हैं कि खास बनाने में कहीं कोई कोर कसर
नहीं छोड़ी गयी। बालकनी में खोपड़ी दिखती है तो खम्भों में हड्डियां साफ तौर
पर नजर आती हैं।
54.931440,-1.783670
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