Friday, 9 March 2018

चीन की गुफा में बसता झॉन्डॉन्ग गांव

  अत्याधुनिक युग में कहीं कोई गिरि कंदराओं व गुफाओं में जीवनयापन की बात करे तो शायद एकबारगी बेमानी सी लगेगी।

   प्राचीनकाल में भले ही गुफाओं में जीवन दिखता हो लेकिन अत्याधुनिक काल में कोई भी गुफाओं में निवास करना या रहना पसंद नहीं करेगा। खास तौर से चीन जैसे विकसित राष्ट्र में तो यह कल्पना भी नहीं की जा सकती।
  जी हां, चीन में एक पूरा गांव एक गुफा में बसता है। हालांकि चीन की शासकीय व्यवस्थाओं ने आधुनिकता व सभ्यता की दुहाई देकर बाशिंदों को गुफा के इस गांव से बाहर निकालने की कोशिश भी की लेकिन बाशिंदों ने गांव को छोड़ने से साफ इंकार कर दिया। 
   चीन के गुइझोऊ प्रांत के एक हिम शिखर पर झॉन्डॉन्ग गांव बसता है। इस गांव में एक सैकड़ा से अधिक परिवार बसते हैं। समुद्र तल से इस गांव की ऊंचाई 1800 मीटर से अधिक है। विशाल गुफा में बसे इस गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर खेलकूद के बड़े मैदान तक सभी कुछ उपलब्ध है। चीन का यह गांव भले ही अत्याधुनिक न हो लेकिन आवश्यकता की सभी जरुरतें गांव में ही पूरी होती है।
   हालांकि चीन की शासकीय व्यवस्थाओं को गुफा का यह गांव कतई नहीं भा रहा है। शायद इसी को ध्यान में रख कर चीन की शासकीय व्यवस्थाओं को देखने वाले अफसरों ने इस गुफा के स्कूल को 2008 में बंद कर दिया। तर्क यह रहा कि यह स्कूल चीन की सभ्यताओं के अनुरुप नहीं है। बाशिंदों ने व्यवस्थाओं के सामने झुकने से इंकार कर दिया। कोई विरोध नहीं कोई प्रदर्शन नहीं।
    अन्तोगत्वा 2011 में स्कूल पुन: चालूू हो गया। स्कूल में नित्य दो घंटे शिक्षा दी जाती है। स्कूल में छात्र कोई टाटपट्टी पर बैठ कर पढ़ाई नहीं करते बल्कि बाकायदा कुर्सी व बेंच की व्यवस्था है। ब्लैक बोर्ड भी है तो रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था भी है। छात्र व शिक्षक दोनो ही इस गुफा के गांव के ही होते हैं। गांव में बाशिंदों की खोज के आधार पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाएं भी चलती हैं तो पीने के पानी सहित सभी जरुरतें गांव में ही पूरी होती हैं।
    हालांकि यह गांव गुफा में काफी ऊंचाई पर है। खरीदारी करने के लिए गांव के बाशिंदों को बाजार जाना पड़ता है। बाजार इस गांव से करीब पन्द्रह किलोमीटर दूूर है। गांव के बाशिंदे चाहते हैं कि चीन की शासकीय व्यवस्थाओं के तहत गांव का विकास हो लेकिन सिस्टम की लाचारी है कि चाहते हुए भी गुफा के अंदर विकास नहीं कर पा रहे हैं। 
   इन सब के बावजूद इस गुफा के बाशिंदे खुश हैं। बताते हैं कि गुफा का यह गांव सदियों से यूं ही चला आ रहा है। गांव के बाशिंदे अपनी सभी आवश्यकताओं का इंतजाम खुद ही करते हैं। इसके लिए वह किसी सहायता पर निर्भर नहीं रहते।

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