Tuesday, 13 March 2018

दुनिया की बेहतरीन रोमांचक गुफा क्रुबेरा

     खण्डहर में भी सौन्दर्य ! जी हां, सामान्यत: खण्डहर को नैराश्य से अभिभूत रेखांकित किया जाता है। आश्चर्य ही होगा कि नैराश्य में भी सौन्दर्य का लालित्य आकर्षित करे।

   देश-दुनिया में प्राकृतिक सौन्दर्य से लबरेज गिरि-कंदराओं, गुफाओं, घाटियों व खण्डहरों की एक लम्बी श्रंखला है। जार्जिया के अबखाजिया स्थित क्रुबेरा गुफा को दुनिया की सबसे लम्बी व आकर्षक गुफा का दर्जा हासिल है।
   दुनिया की सबसे लम्बी व खूबसूरत गुफा का दर्जा हासिल करने वाली क्रुबेरा गुफा को वैज्ञानिकों ने करीब पचपन साल पहले 1960 में खोजा था। जार्जिया के पश्चिमी काकेशस में गाग्रा में स्थित है। इसे अब अबखाजिया के नाम से जाना जाता है। प्रवेश द्वार से गुफा करीब 2197 मीटर अर्थात 7208 फुट गहराई वाली  है। 
    विशेषज्ञों की मानें तो इसे 2001 में दुनिया की सबसे अधिक गहरी व लम्बाई वाली गुफा का दर्जा हासिल हुआ। इस गुफा का यूक्रेन स्पेलियोलोजिकल एसोसियेशन के विशेषज्ञों ने विधिवत अध्ययन किया। यूक्रेनी गोताखोर जिनेडी स्मोखिन ने इस विशालतम गुफा में एक अति सुन्दर ड्राइविंग टर्मिनल बनाया। करीब 13.432 वर्ग किलोमीटर दायरे वाली इस गुफा में प्राकृतिक सौन्दर्य निहारते ही बनता है।
    इस गुफा के अन्दर सौन्दर्य की एक अलग ही दुनिया दिखती है। इस विशालतम गुफा में रोशनी के कोई इंतजाम न होने के बावजूद कोना-कोना प्राकृतिक प्रकाश से जगमग रहता है। गुफा का एक एक कण अपने सौन्दर्य से दर्शकों एवं पर्यटकों को आकर्षित करता व लुभाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे किसी शिल्पकार ने बड़े ही सलीके से गुफा का कोना-कोना गढ़ा हो लेकिन यह गुफा दुनिया को प्रकृति का सुन्दर व बेहतरीन उपहार है। जिसे देखने के लिए दुनिया से बड़ी संख्या में दर्शक एवं पर्यटक आते हैं।
   चूना पत्थर के शिलाखण्ड पर आधारित इस गुफा में रोमांच की कोई सीमा नहीं है। जलाशय में जल निर्मलता का सौन्दर्य अभिभूत कर देता है तो वहीं प्रकाश पुंज का आलोक स्वप्नलोक अथवा स्वर्ग का एहसास कराता है। गुफा का दुर्गम मार्ग होने के बावजूद सैलानियों का तांता लगा रहता है। खास तौर से पर्यटक व खिलाडियों का जमावड़ा रहता है लेकिन हर किसी को गुफा में प्रवेश की इजाजत नहीं मिलती।
    स्थानीय प्रशासन की इजाजत के बाद ही गुफा में प्रवेश की इजाजत मिलती है। सौन्दर्य से लबरेज इस गुफा को वोरोन्या गुफा के नाम से भी जाना जाता है। जार्जिया के ब्लैक महासागर की अरेबिक मासिक पहाड़ी पर यह विशालतम गुफा स्थित है। गुफा में प्रवेश करना अत्यंत रोमांचक महसूस होता है।
    गुफा में प्रवेश करने के करीब 1300 मीटर के बाद गुफा कई हिस्सों में विभक्त हो जाती है। जिसे जिस दिशा में जाना हो, यह खुद तय करना होता है। इसे कौओं की गुफा के तौर पर भी देखा जाता है क्योंकि इस सुन्दर गुफा में कौओं के असंख्य घोसले देखने को मिल जाएंगे। हालांकि इन कौओं से दर्शक, पर्यटक व खिलाड़ियों को कोई दिक्कत या परेशानी नहीं होती।
43.001554,41.023407

Sunday, 11 March 2018

ब्लू होल: मनोरंजकता में भी खतरा

   'सौन्दर्य शास्त्र" का कथ्यात्मक तथ्यात्मक आलोक निश्चय ही किसी को भी लुभाने में समर्थ कहा जाएगा। प्राकृतिक सौन्दर्य जहां एक ओर मन-मस्तिष्क को प्रफुल्लित करता है तो वहीं इसमें खतरे भी कम नहीं। लाल सागर मिरुा तट पर प्राकृतिक सौन्दर्य का नायाब स्थल है।

   इस स्थल को ब्लू होल के नाम से दुनिया में जाना-पहचाना जाता है। गोताखोर समुदाय का यह एक अति पसंदीदा स्थल है लेकिन ब्लू होल गोताखोरों के लिए बेहद खतरनाक भी माना जाता है। देश दुनिया के तमाम पर्यटक इस स्थल पर गोतोखोरी देखने जाते हैं। 
  इसे 'दुनिया के सबसे खतरनाक गोता स्थल" व 'गोताखोर के कब्रिास्तान" के तौर भी जाना जाता है। करीब सौ मीटर गहराई वाले इस ब्लू होल में करीब तीस मीटर लम्बी सुरंग भी है। हालांकि इसका प्रवेश स्थल करीब छह मीटर चौडा़ई वाला है। सुरंग को कट्टर के रुप में जाना जाता है। इस इलाके में मंूगा व चट्टानी मछली की उपलब्धता बहुतायत में है। 
     मिरुा शासन ने इस स्थल पर खास तौर से गाइड्स व प्रशिक्षित कर्मचारी तैनात किए हैं जिससे किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। हालांकि मनोरंजक ड्राइविंंग के लिए बड़ी तादाद में गोताखोर यहां आते हैं।
   विशेषज्ञों की मानें तो अति गहराई में नाइट्रोजन रसायन का प्रभाव मिलता है। नाइट्रोजन का प्रभाव गोताखोरों के लिए बेहद खतरनाक होता है क्योंकि इससे गोताखोरों में शराब का नशा जैसा होने लगता है। नशा का प्रभाव शरीर में होते ही गोताखोरों का फिर बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में गोताखोर की मौत हो जाती है। ब्लू होल बेहद आकर्षक अर्थात मेहराब जैसा काफी कुछ प्रतीत होता है।
     ब्लू होल की गहराई में धीरे-धीरे गैसों के मिश्रित प्रभाव से गोताखोर को नींद आने लगती है। बस गोताखोरों की मौत के यही कारण होते हैं। हालांकि शासकीय गाइड्स निश्चित सीमा से अधिक आगे जाने के इजाजत नहीं देते हैं। फिर भी गोताखोर जोश व मनोरंजकता में निश्चित दायरे से कहीं आगे बढ़ जाते हैं। जिससे हादसे हो जाते है। 
   मिरुा के शासकीय अफसरों की मानें तो अब तक सौ से अधिक गोताखोर मौत का शिकार हो चुके हैं। मौतों को देख कर मिरुा शासन ने एहतिहाती उपाय किए हैं। ऐसा नहीं कि इस क्षेत्र में जीवाश्म (जीव-जन्तु) भी बड़ी तादाद में पाए जाते हैं। मगरमच्छ व कछुओं की तादाद कहीं अधिक होती है। इस क्षेत्र में रसायनिक पदार्थों की उपलब्धता भी पर्याप्त मात्रा में है। खास बात यह है कि ब्लू होल का जल कहीं मीठा तो कहीं खारा है।

Friday, 9 March 2018

दुनिया का नायाब अमेरिका का गोल्डन गेट ब्रिज

   वास्तुकला की बात हो या नक्कासी या फिर विकास की फर्राटा दौड़ हो... दुनिया में नायाब आयाम गढ़ने में कोई देश किसी से पीछे नहीं।

   नदियों व नहरों पर झूला पुलों की देश-दुनिया में एक लम्बी श्रंखला है लेकिन अमेरिका का गोल्डन गेट ब्रिज (सेतु) अपनी विलक्षणताओं के कारण दुनिया में अपनी एक अलग ही पहचान रखता है।
  कुल करीब 2737 मीटर लम्बाई वाला यह झूला पुल अब अपनी आयु के करीब अस्सी वर्ष पूर्ण करने वाला है। इस झूला पुल का विधिवत उद्घाटन 27 मई 1937 को हुआ था। यह झूला पुल अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को को कई इलाकों व मुख्य महामार्गों से जोड़ता है। सैन फ्रांसिस्को खाड़ी के दोनों किनारों को जोड़ता है। 
    विशेषज्ञों की मानें तो निर्माणकाल में इस झूला पुल को दुनिया का सबसे लम्बा झूला पुल माना गया था। यह अमेरिका के एक सौ एक महामार्गों को जोड़ता है। सिक्स लेन की चौड़ाई वाले इस पुल पर एक साथ सैकड़ों वाहन फर्राटा भरते हैं। करीब नब्बे फुट इस पुल की चौड़ाई है। जबकि ऊंचाई 227 मीटर से भी अधिक है। इसके निर्माण में लाखों टन लौह का विभिन्न तौर तरीके से इस्तेमाल किया गया।
   डिजाइन भी अद्भूत है। सैन फ्रांसिस्को, कैलीफोर्निया व मैरीन काउंटी सहित कई क्षेत्रों के लिए यह विशेष विकास का आयाम है। सांझ ढ़लते ही गोल्डन गेट ब्रिज व आसपास का इलाका रोशनी की चकाचौंध से जगमगा उठता है।
  सैन फ्रांसिस्को एवं कैलिफोर्निया के लिए यह एक अंतर्राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न बन चुका है। सांझ होने के साथ ही खाड़ी का जल भी उछाल मारता है। कई बार तो खाड़ी का जल-पानी उछाल मार कर पुल तक भी पहंुच जाता है लेकिन यह जल क्रीड़ा भी यात्रियों-राहगीरों व पर्यटकों को आंनदित करती है।
   हालांकि सामान्य जल स्तर से इस पुल की ऊंचाई अर्थात नीचे का हिस्सा करीब 67 मीटर ऊंचा है। पुल के नीचे से जल यातायात भी निरन्तर चलता रहता है। झूला पुल पर चकाचौंध रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था है। डिजाइन ऐसा है कि खाड़ी की जलक्रीड़ा का लाइटिंग सिस्टम पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता अर्थात जनजीवन को कोई खतरा नहीं रहता। 
   दुनिया के इस विशालतम झूला पुल की कल्पना-परिकल्पना सस्पेंशन, ट्रस आर्क एवं टअस काजवेज ने की थी।इस पुल के अनुरक्षण का कार्य गोल्डन गेट ब्रिाज हाईवे एण्ड ट्रांसपोर्ट के हवाले है। यह विकास का एक आयाम भर ही नहीं बल्कि एक पर्यटन स्थल भी है। देश-दुनिया से बड़ी संख्या में पर्यटक इस पुल का सौन्दर्य निहारने आते हैं।

चीन की गुफा में बसता झॉन्डॉन्ग गांव

  अत्याधुनिक युग में कहीं कोई गिरि कंदराओं व गुफाओं में जीवनयापन की बात करे तो शायद एकबारगी बेमानी सी लगेगी।

   प्राचीनकाल में भले ही गुफाओं में जीवन दिखता हो लेकिन अत्याधुनिक काल में कोई भी गुफाओं में निवास करना या रहना पसंद नहीं करेगा। खास तौर से चीन जैसे विकसित राष्ट्र में तो यह कल्पना भी नहीं की जा सकती।
  जी हां, चीन में एक पूरा गांव एक गुफा में बसता है। हालांकि चीन की शासकीय व्यवस्थाओं ने आधुनिकता व सभ्यता की दुहाई देकर बाशिंदों को गुफा के इस गांव से बाहर निकालने की कोशिश भी की लेकिन बाशिंदों ने गांव को छोड़ने से साफ इंकार कर दिया। 
   चीन के गुइझोऊ प्रांत के एक हिम शिखर पर झॉन्डॉन्ग गांव बसता है। इस गांव में एक सैकड़ा से अधिक परिवार बसते हैं। समुद्र तल से इस गांव की ऊंचाई 1800 मीटर से अधिक है। विशाल गुफा में बसे इस गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर खेलकूद के बड़े मैदान तक सभी कुछ उपलब्ध है। चीन का यह गांव भले ही अत्याधुनिक न हो लेकिन आवश्यकता की सभी जरुरतें गांव में ही पूरी होती है।
   हालांकि चीन की शासकीय व्यवस्थाओं को गुफा का यह गांव कतई नहीं भा रहा है। शायद इसी को ध्यान में रख कर चीन की शासकीय व्यवस्थाओं को देखने वाले अफसरों ने इस गुफा के स्कूल को 2008 में बंद कर दिया। तर्क यह रहा कि यह स्कूल चीन की सभ्यताओं के अनुरुप नहीं है। बाशिंदों ने व्यवस्थाओं के सामने झुकने से इंकार कर दिया। कोई विरोध नहीं कोई प्रदर्शन नहीं।
    अन्तोगत्वा 2011 में स्कूल पुन: चालूू हो गया। स्कूल में नित्य दो घंटे शिक्षा दी जाती है। स्कूल में छात्र कोई टाटपट्टी पर बैठ कर पढ़ाई नहीं करते बल्कि बाकायदा कुर्सी व बेंच की व्यवस्था है। ब्लैक बोर्ड भी है तो रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था भी है। छात्र व शिक्षक दोनो ही इस गुफा के गांव के ही होते हैं। गांव में बाशिंदों की खोज के आधार पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाएं भी चलती हैं तो पीने के पानी सहित सभी जरुरतें गांव में ही पूरी होती हैं।
    हालांकि यह गांव गुफा में काफी ऊंचाई पर है। खरीदारी करने के लिए गांव के बाशिंदों को बाजार जाना पड़ता है। बाजार इस गांव से करीब पन्द्रह किलोमीटर दूूर है। गांव के बाशिंदे चाहते हैं कि चीन की शासकीय व्यवस्थाओं के तहत गांव का विकास हो लेकिन सिस्टम की लाचारी है कि चाहते हुए भी गुफा के अंदर विकास नहीं कर पा रहे हैं। 
   इन सब के बावजूद इस गुफा के बाशिंदे खुश हैं। बताते हैं कि गुफा का यह गांव सदियों से यूं ही चला आ रहा है। गांव के बाशिंदे अपनी सभी आवश्यकताओं का इंतजाम खुद ही करते हैं। इसके लिए वह किसी सहायता पर निर्भर नहीं रहते।

दुनिया का खतरनाक ज्वालामुखी माउंट मेरापी

   प्राकृतिक सौन्दर्य मन मस्तिष्क को प्रफुल्लित करता है तो वहीं देश-दुनिया में खतरे भी कम नहीं। दुनिया का शायद ही कोई ऐसा देश हो जहां प्राकृतिक सौन्दर्य से लबरेज स्थल न हों। 

   प्रकृति ने जहां सौन्दर्य, लालित्य व माधुर्य के उपहार दिये वहीं खतरनाक स्थलों की लम्बी श्रंखलाएं भी दीं। जिससे देश-दुनिया को सावधान एवं सतर्क भी रहना चाहिए।
   जी हां, इण्डोनेशिया के योग्याकार्ता सीमा पर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खतरनाक ज्वालामुखी में से एक है। माउंट मेरापी वोल्केनो के नाम से ख्यात यह एक सक्रिय ज्वालामुखी है। विशेषज्ञों की मानें तो माउंट मेरापी वोल्केनो सैकड़ोें दशक से अनवरत विस्फोटक दशा में सक्रिय एवं क्रियाशील रहता है। हालांकि विस्फोट की रफ्तार कभी कम कभी अधिक होती रहती है।
   यह ज्वालामुखी 1548 से लगातार सक्रिय दिखता है। विस्फोट की तीव्रता कम होने पर इससे तेज धुंआ निकलता है। विशेषज्ञों की मानें तो ज्वालामुखी से निकलने वाला यह धुंआ भी आसमान पर करीब दो मील की ऊंचाई तक दिखता है। इसके आसपास दो लाख से आबादी निवास करती है। इण्डोनेशिया के लिए यह ज्वालामुखी एक बड़ी चिंता का कारण है क्योंकि कभी भीषण विस्फोट हो गया तो एक बड़ा हादसा भी हो सकता है।
     प्राकृतिक उपहारों में सम्पदाओं की भी कहीं कोई कमी नहीं रहती। शोधकर्ताओं की मानें तो इस विस्फोटक ज्वालामुखी में विभिन्न गैसों का प्रचुर भण्डारण है। जिसका देश दुनिया के लिए बेहतर उपयोग किया जा सकता है। 
    दुनिया के विशेषज्ञों का दल गैसों की उपलब्धता से लेकर उपयोगिता तक का अध्ययन कर रहे हैं जिससे देश दुनिया के लिए उपलब्ध गैस भण्डार का उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। इण्डोनेशिया का यह ज्वालामुखी योग्याकार्ता से करीब 28 से 30 किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में है। विस्फोट के समय आसमान आग के गोलों से भर जाता है। वायु मण्डल आग उगलने लगता है। 
      ऐसा नहीं है कि इन खतरों से आबादी अनजान व निर्भय है। इण्डोनेशिया सरकार इस इलाके के बाशिंदों को कई बार चेता चुकी है कि इस इलाके में जीवन सुरक्षित नहीं है। लिहाजा इलाका छोड़ दें। सैकडों लोग ज्वालामुखी की विभिषिका का शिकार हो चुके हैं।

Wednesday, 7 March 2018

विलक्षण रीड बांसुरी गुफा

    'प्राकृतिक उपहार श्रंखला" से देश दुनिया लबरेज है। यह प्राकृतिक श्रंखला दर्शकों एवं पर्यटकों को अपनी विलक्षणता से न केवल आकर्षित करती है बल्कि मन-मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ देती है। जिससे दर्शक एवं पर्यटक लम्बे समय तक भूल नहीं पाते। चीन के गुइलिन में एक विलक्षण गुफा है। 

   इस बहुरंगी गुफा का अवलोकन करने या देखने देश दुनिया के दर्शक या पर्यटक बड़ी संख्या आते-जाते रहते हैं। देश दुनिया के पर्यटकों के आकर्षण के  इस केन्द्र को रीड बांसुरी गुफा (रीड फ्लूट केव) के नाम से जाना जाता है।
  यह दिलचस्प गुफा बहुरंगी प्रकाश से हमेशा आलोकित रहती है। इसके लिए प्रकाश की कहीं कोई अतिरिक्त व्यवस्था नहीं है बल्कि शिला खण्ड अर्थात पत्थर श्रंखला की चमक से गुफा आलोकित रहती है। गुफा में अनवरत बहुरंगी-इन्द्रधनुषी प्रकाश की किरणें परिवेश में तैरती रहती हैं। इस गुफा में  लाइमस्टोन (चूना पत्थर) की एक लम्बी श्रंखला है।
    खास बात यह है कि इन पत्थर श्रंखला से निकलने वाला प्रकाश विभिन्न रंगों वाला होता है। इतना ही नहीं गुफा में मधुरता व सुरीलापन का भी एहसास होता है कि जैसे गुफा में बांसुरी की मधुर तान-मधुर राग की अठखेलियां हो रही हों। करीब पांच सौ मीटर से अधिक लम्बी यह गुफा अपने अंदर अनेक आकर्षण छिपाये है। 
    विशेषज्ञों की मानें तो यह विलक्षण गुफा एक हजार दो सौ वर्ष से भी अधिक पुरानी है। गुफा में शिला खण्ड की विलक्षण व अद्भूत आकृतियां भी अवलोकित होती हैं। यह कलाकृतियां कलात्मकता से परिपूरित हैं। इसमें रॉक संरचनाओं की विशिष्टता दिखती है। इनमें सत्तर से अधिक शिलालेख शामिल हैं। जिसमें चीन के तांग राजवंश का उल्लेख मिलता है।
   विशेषज्ञों की मानें तो यह प्राचीन शिलालेख गुइलिन की विशिष्टताओं को भी दृश्यांकित करते हैं। यह विलक्षण एवं अदभूत गुफा करीब पौन सौ वर्ष पहले सन 1940 में प्रकाश में आयी। बताते हैं कि कभी जापानी सैनिकों के समूह ने इस स्थान पर शरण ली थी।इसके बाद धीरे-धीरे यह गुफा देश दुनिया में दर्शकों एवं पर्यटकों के बीच आकर्षण का केन्द्र बन गयी। चीन के शीर्ष पर्यटन स्थलों में रीड बांसुरी गुफा को जाना जाता है।

Sunday, 4 March 2018

गिएथूर्न गांव: सड़कें नहीं, नहरों का संजाल

     'ईको फ्रैण्डली" गांव निश्चय ही लुभावने होंगे, इसमें कहीं कोई शक-संदेह नहीं। परिकल्पना होती है कि आदर्श गांव हो तो चमचमाती सड़कें हो... मूलभूत सेवाओं-सुविधाओं की श्रंखला बेहतरीन हो... कोलाहल से दूर सुरम्य वातावरण हो... प्राकृतिक सौन्दर्य की आभा से परिवेश आलोकित हो रहा हो। 

  जी हां, इन सभी खूबियों से लबरेज नीदरलैण्ड का एक गांव 'गिएथूर्न" देश-दुनिया के पर्र्यटकों के लिए खास बन गया। स्वप्न लोक के इस गांव में खास यह है कि गांव में सड़कों का संजाल नहीं है। सपनों के इस गांव में खूबसूरती के साथ ही सादगी भी खास है।
   शायद इसी लिए इसे 'दक्षिण का वेनिस" एवं 'नीदरलैण्ड का वेनिस" भी कहा जाता है। हॉलैण्ड-नीदरलैण्ड का यह विशिष्ट पर्यटन स्थल बन चुका है। नीदरलैण्ड के 'गिएथूर्न गांव" में देश विदेश के पर्यटकों की आवाजाही हमेशा बनी रहती है।
   इस गांव में सड़कों का संजाल तो नहीं अलबत्ता नहरों का गजब का संजाल है। करीब साढ़े सात किलोमीटर दायरे में फैला नहरों का यह नेटवर्क ही आवाजाही अथवा यातायात का सुगम मार्ग है। आदर्श गांव हो आैर कोई चमचमाती कार या बाइक न हो, ऐसा हो नहीं सकता लेकिन ताज्जुब है कि इस गांव में न तो कोई कार है आैर न ही कोई बाइक ही है।
   इसका एक बड़ा कारण भी है कि इस ईको फ्रैण्डली गांव में वाहनों को चलाने लायक सड़क भी तो नहीं हैं। गांव में कहीं किसी को जाना हो तो सुगम साधन  बोट (नाव) है। इन नहरों में इलेक्ट्रिक मोटर बोट भी चलती है। इन नावों से कोई शोर-शराबा नहीं होता। गांव के बाशिंदों को कहीं कोई शिकायत भी नहीं रहती। आसपड़ोस में आने जाने के लिए बाशिंदों ने नहरों के उपर लकड़ी के पुुल बना रखे हैं। जिससे बाशिंदों को आसपड़ोस में आने-जाने में सहूलियत रहती है।
    नीदरलैण्ड व दुुनिया के इस विलक्षण गांव का उद्भव वर्ष 1230 में बताया जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो वर्ष 1170 की विकराल बाढ़ से यह इलाका अत्यधिक प्रभावित रहा। इस इलाके में आबादी की चहलकदमी पर बाशिंदों को बकरियों के असंख्य सींग मिले थे। 
    शायद इसी लिए इस स्थान का नाम पहले गेटेनहोर्न पड़ा। गेटेनहोर्न का शाब्दिक अर्थ 'बकरियों के सींग" होता है। यही गेटेनहोर्न अपभ्रंश होकर अब  गिएथूर्न बन गया। इस गांव में नहरों का संजाल न तो किसी शासकीय योजना के तहत बना न किसी योजनाबद्ध तौर तरीके से नहरों को खोदा गया। विशेषज्ञों की मानें तो 1170 की प्रलयंकारी बाढ़ में भारी तादाद में दलदली मिट्टी व बहुमूूल्यवान वनस्पतियां बह कर आ गयीं। दलदली मिट्टी वनस्पतियों को यह मिलाजुुला स्वरुप र्इंधन के तौर पर उपयोगी माना गया। 
   शायद इसी लिए बाशिंदों ने खोदाई की। खोदाई होते-होते कब इस गांव में नहरों का संजाल बन गया, बाशिंदों को पता ही नहीं चला। शायद किसी को अनुमान नहीं होगा कि खोदाई अचानक ऐसा स्वरुप ले लेगा, जिसे दुनिया के एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के तौर जाना जायेगा। इस गांव में करीब साढ़े सात किलो मीटर लम्बी नहरों का संजाल है। 
     बताते हैं कि करीब छह दशक पहले यह गांव अचानक विश्व पर्यटन मानचित्र पर छा गया। वर्ष 1958 के आसपास डच कामेडी फिल्म फेनफेयर की शूटिंग गिएथूर्न गांव में की गयी। इसके बाद यह गावं दुनिया में खास तौर से ईको फ्रैण्डली विलेज के तौर पर जाना जाने लगा। इस फिल्म को बनाने वाले बर्ट हांस्त्रा थे। 'नो कार नो पाल्यूशन" की छवि के साथ ही इस गांव का कोना-कोना प्राकृतिक सौन्दर्य से लबरेज है।
    वातावरण में एक खुशबू के साथ मंद-मंद पवन भी मन-मस्तिष्क को झंकृत कर देती है। नहरों के उपर लकड़ी के शानदार पुल हैं तो गांव में शानदार म्युजियम भी हैं। इस गांव में नये नवेले आशियाने दिखेंगे तो वहीं दो वर्ष पुराने घर-घरौंदे भी शानदार आवरण में नजर आयेंगे।
  इस गांव में सैर सपाटा करने के लिए एमस्टडर्म एयरपोर्ट से भी जा सकते हैं तो रोटेर्डम एयरपोर्ट से भी यात्रा का लुफ्त उठा सकते हैं। एमस्टडर्म एयरपोर्ट से गिएथूर्न गांव की दूूरी करीब 95 किलोमीटर है तो वहीं रोटेर्डम एयरपोर्ट से करीब एक सौ दस किलोमीटर की दूरी है। इस गांव तक पहंुचने के लिए बस व रेल मार्ग से भी जाया जा सकता है।

ब्लड फॉल्स लेक: हवा से पानी का रंग लाल

    दुनिया में अजब-गजब करिश्मों की कहीं कोई कमी नहीं। कहीं पेड़-पौधे विचित्र आकार-प्रकार में दिखते हैं तो कहीं जल-पानी अपना रुप-रंग बदलता दिखता है तो कहीं इमारतों की विचित्रता आकर्षित करती है।

   विक्टोरिया की धरती उत्तरी-पूर्वी अंटार्कटिका में एक विलक्षण लेक अर्थात झील है। इस झील का पानी हवा व आक्सीजन के सम्पर्क में आते ही अपना रंग बदल देता है।
   अंटार्कटिका सहित दुनिया में इस झील को ब्लड फॉल्स लेक अर्थात रक्त झरना के नाम से जाना-पहचाना जाता है। लौह तत्व से परिपूरित इस झील का जल पूरी तरह से खारा है। ब्लड फॉल्स लेक निर्जन स्थान पर लाल रंग के जल प्रपात के तौर पर दिखती है। वस्तुत: यह ग्लेशियर पर स्थित है। दो ग्लेशियर के बीच में स्थित इस झील का जल हवा-आक्सीजन के सम्पर्क में आते ही लाल हो जाता है। 
    इसमें जंग के तत्व साफ दिखते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो बीस लाख सालों से यह विलक्षण जल परिवर्तन अनवरत चला आ रहा है। लौह तत्वों की अत्यधिक मात्रा होने के कारण इसके जल में परिवर्तन लाती रहती हैं। इस पूरे इलाके में बर्फ के छोटे-बड़े झरने व छोटे-बड़े दरारों में दिखते हैं। यह जलप्रपात आस्ट्रेलियाई भूवैज्ञानिकों की दृष्टि में पहली बार आया।
     विशेषज्ञों की मानें तो बर्फ की सतह पर बड़ी तादाद में घुलनशील फेरिक आक्साइड की उपलब्धता होने के कारण विलक्षणतायें दिखती हैं। खारा पानी में लौह तत्वों की उपलब्धता जल को विशिष्ट बनाती है। विशेषज्ञों की मानें तो ब्लड फॉल्स के पानी का परीक्षण किया गया तो डेढ़ दर्जन से अधिक प्रकार पाये गये। इस जल में रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता भी पायी गयी।
    इसमें कार्बनिक पदार्थों के साथ साथ सल्फेट भी पाया जाता है। वैज्ञानिक एवं इंजीनियर्स के शोध में केमिकल एवं माइक्रोबियल तत्व भी प्रचुरता में पाये गये। चमकदार लाल रंग का यह झरना मैक्मुडों की सूखी घाटी क्षेत्र में है। इस स्थान को धरती के सबसे शीतलता-ठंड़ा एवं सबसे दुर्गम स्थानों में माना जाता है। सूक्ष्म जीवों की करीब डेढ़ दर्जन प्रजातियां इस जल में पायी जाती हैं। बताते हैं कि झील के जल का एक बड़ा हिस्सा अभी भी भूगर्भ में है।
      भूवैज्ञानिकों की मानें तो इस तरह के नमकीन पानी के सैकड़ों क्षेत्र भूगर्भ में उपलब्ध होने का अनुमान है। जल की विशिष्टिताओं का लेकर भूजल वैज्ञानिकों में उत्साह भी है तो आश्चर्य भी है।विशेषज्ञों की मानें तो अंटार्कटिका के इस स्थान से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। ब्लड फॉल्स केवल एक विसंगति भर नहीं है बल्कि दुनिया के लिए यह स्थान शोध स्थल है। भूगर्भ जल में नमकीन जल प्रणाली तो वहीं सूखी घाटियां आश्चर्य पैदा करती हैं।

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